यह एक स्थाई अंतर सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है इसका गठन 2001 में औपचारिक रूप से किया गया
लेकिन पहले इसे शंघाई फाइव के नाम से जाना जाता था
इसकी आधिकारिक भाषाएं रूसी और चीनी हैं
इसके क्या उद्देश है ?
इसका उद्देश्य सदस्य देशों के साथ आपसी विश्वास को मजबूत करना है
यह संगठन राजनीति ,व्यापार ,अर्थव्यवस्था ,अनुसंधान ,प्रौद्योगिकी और संस्कृत एवं शिक्षा परिवहन, पर्यटन ,पर्यावरण संरक्षण आदि के क्षेत्रों में सदस्य देशों के साथ प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना है
इस संगठन के तहत क्षेत्रीय शांति सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त प्रयास करना है
SCO के सदस्य देश–
इसके कुल 8 सदस्य हैं भारत, पाकिस्तान ,उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान , रूस, किर्गिस्तान,कजाकिस्तान,और चीन है
इसके 4 पर्यवेक्षक देश भी हैं अफगानिस्तान ,बेलारूस ,इरान और मंगोलिया हैं
SCO का इतिहास –
1991 में USSR का विघटन हुआ और 15 नए देश अस्तित्व में आए।
नए देशों के बीच अपनी– अपनी सीमा को लेकर संघर्ष शुरू हो गए
इसी संघर्ष को देखते हुए 1996 में शंघाई फाइव ( एक अनौपचारिक संगठन )का गठन किया गया
इस संगठन का कार्य सीमा सीमांकन और विसैन्यीकरण वार्ता आयोजित करना था
इसके सदस्य देश कजाखस्तान, चीन ,किर्गिस्तान रूस और तजाकिस्तान थे
2001 में शंघाई फाइव में उज्बेकिस्तान को शामिल किया गया और इसका नाम बदलकर SCO कर दिया गया
SCO का पहला शिखर सम्मेलन जून 2001 में किया गया
जून 2002 में इसका दूसरा शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया यह रूस के दूसरे सबसे बड़े शहर सेंट पीटर्सबर्ग में किया गया और इसी सम्मेलन में SCO चार्टर पर भी हस्ताक्षर किए गए
यह चार्टर SCO के सिद्धांतों ,उद्देश्य और संरचना का उल्लेख करता है
जुलाई 2005 पांचवा शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया और इसी सम्मेलन के दौरान भारत ,पाकिस्तान और ईरान को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया
यह सम्मेलन कजाकिस्तान की राजधानी अस्थाना में किया गया (2019 में इसका नाम नूरसुल्तान कर दिया गया )
जून 2017 इस सम्मेलन में भारत और पाकिस्तान को पूर्ण सदस्य का दर्जा दिया गया
2018 में 18वां शिखर सम्मेलन हुआ सम्मेलन में पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री शामिल हुए थे
SCO का महत्व –
यूरेशिया के नेतृत्व का दावा करता है
इसके 8 सदस्य देश यूरेशिया के क्षेत्र का 80% कवर करते हैं
इसके सदस्य देशों की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या के 43 प्रतिशत है
इसके सदस्य देश विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में एक चौथाई हिस्सेदारी रखते हैं
यह भौगोलिक देश और जनसंख्या के मामले में सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है
इस संगठन में 4 परमाणु शक्ति वाले देश शामिल हैं
यह क्षेत्रीय स्तर पर शांति कायम करने में मददगार है
यह आतंकवादी घटनाओं को रोकने में भी सहायक है
2011 से 2015 के बीच समन्वय के माध्यम से 20 से अधिक हमलों को रोका गया
यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एशिया का प्रतिनिधित्व करता है
भारत के लिए SCO का महत्व–
क्षेत्रीय सुरक्षा –यह भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदान करता है
यह अलगाववाद और आतंकवाद से निपटने में भारत को सहायता प्रदान करता है
मध्य एशिया के संबंध– एशिया राजनीति को आगे बढ़ाने हेतु SCO – shanghai cooperation organization एक मंच के रूप में सामने आया है
पाकिस्तान और चीन के साथ वार्ता करने के लिए यह संगठन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है