खबरों में क्यों है?
- CPEC को लेकर चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के मध्य वर्चुअल माध्यम से एक बैठक आयोजित की गई ।
- इस और इस बैठक के दौरान इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई ।
- साथ ही इस बैठक के दौरान 2 देशों के प्रतिनिधियों ने अन्य देशों को भी इस परियोजना में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया ।
- इस बैठक के बाद ही अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह कौन से देश होंगे जो इस परियोजना से जुड़ेंगे और साथ ही इस बात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है कि इस नए विस्तार का दुनिया पर खासतौर पर भारत पर क्या असर पड़ेगा?
चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)–
- CPEC 3000 किलोमीटर लंबी बुनियादी ढांचा परियोजना है ।
- यह चीन के उत्तर पश्चिम शिंजियांग स्वायत्त क्षेत्र और पाकिस्तान के पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को आपस में जोड़ती है ।
- यह चीन पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय परियोजना है ।
- इस परियोजना के माध्यम से ऊर्जा उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी परियोजनाओं का विकास करना है।
- साथ ही राजमार्गों ,रेलवे और पाइपलाइनों के जरिए कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा दिया जाएगा ।
- ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से चीन को मध्य पूर्व और अफ्रीका तक पहुंच प्राप्त होती है ।
- हिंद महासागर तक भी चीन को पहुंच मिलेगी ।
- यह पाकिस्तान के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है ।
- यह पाकिस्तान के उर्जा संकट से निपटने के लिए भी महत्वपूर्ण है ।
- इसे BRI ‘बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव’ के हिस्से के तौर पर शुरू किया गया था।
- BRI को चीन द्वारा 2013 में शुरू किया गया था।
- BRI का प्राथमिक उद्देश्य सिल्क रोड को पुनर्जीवित करना है ।
- इसके माध्यम से दक्षिण पूर्व एशिया ,मध्य एशिया ,खाड़ी क्षेत्र और अफ्रीका को जोड़ने की बात कही जा रही है।
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चीन पाकिस्तान के लिए CPEC के महत्व –
- यह BRI का सबसे महत्वपूर्ण और अधिक लागत वाला घटक है ।
- यह दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण है ।
- इस परियोजना के माध्यम से कनेक्टिविटी और ऊर्जा के अवसंरचना परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ।
- इस परियोजना की शुरुआत 2015 में हुई थी तब इसकी लागत लगभग 46 बिलियन डॉलर थी ।
- 2017 में देखा गया कि इस परियोजना की लागत लगभग 60 बिलियन डालर के पास पहुंच गई है ।
- इस परियोजना के पूरा होने पर चीन और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर खासा प्रभाव हो सकता है ।
- इससे रोजगार का सृजन होगा ।
परियोजना के मुख्यतः तीन घटक हैं –
- इस परियोजना के माध्यम से पाकिस्तान में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे का विकास करना है ।
- आधुनिक परिवहन और दूरसंचार नेटवर्क विकसित करना।
- जिसके माध्यम से पश्चिमी चीन और पाकिस्तान के तटीय बंदरगाहों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना है ।
- इसके माध्यम से चीन को 40 साल की लीज के साथ ग्वादर क्षेत्र के गहरे पानी के बंदरगाह विकसित करने की अनुमति देना है ।
भारत इसका विरोध क्यों कर रहा है ?
- भारत CPEC का बड़ा बड़ा आलोचक है ।
- यह पाक अधिकृत कश्मीर (Pok) से होकर गुजरता है ।
- भारत इस क्षेत्र को देश का अभिन्न अंग मानता है।
- यह भारत के क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है ।
- इससे यूरेशिया क्षेत्र तक भारत की पहुंच में कमी होगी।
- Pok पश्चिम मध्य और पूर्वी एशिया तक पहुंचने का मार्ग है ।
- चीन के आने से यह क्षेत्र ब्लॉक हो जाएगा ।
- इस परियोजना के तहत एक मोटर वे भी प्रस्तावित किया गया है ।
- इसकी वजह से भारत में आतंकियों की घुसपैठ बढ़ सकती है ।
- यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है ।
परियोजना के विस्तार की क्या जरूरत?
- पाकिस्तान में इस परियोजना को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है ।
- 2015 से लेकर अब तक इस परियोजना का अधिकांश कार्य भी पूरा नहीं हो सका है ।
- 2018 में इमरान खान के सत्ता में आने से इसका कार्य और अधिक धीमा पड़ गया था ।
- वर्तमान समय में पाकिस्तान गंभीर आर्थिक समस्या का सामना कर रहा है ।
- महामारी के बाद से चीन की अर्थव्यवस्था भी धीमी हो गई है ।
- चीन ने कई बड़ी परियोजना में जो निवेश किया है उसे उसका कोई लाभ नहीं हुआ है ।
- BRI के लिए नेपाल– चीन समझौता 2017 में हुआ था ।
- इतने वर्ष बाद भी अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है ।
- चीन में बैंकिंग संकट भी मौजूद है ।
- चीन के बैंक आम लोगों का पैसा नहीं लौटा पा रहे हैं।
- आम लोग इसका विरोध कर रहे हैं ।
- चीन में मौजूदा हालत यह है कि बैंकों की सुरक्षा के लिए टैंको की जरूरत पड़ गई है।
- चीन के पानी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए पैसा नहीं बचा है ।
- ऐसे में एक साथी देश की जरूरत है जो इस परियोजना में निवेश कर सके।
CPEC का नया सदस्य देश कौन होगा?
- अब तक कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है ।
- जनवरी 2022 में ग्लोबल टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में सऊदी अरब ,संयुक्त अरब अमीरात और जर्मनी का नाम सुझाया था ।
- ग्लोबल टाइम्स चीन सरकार द्वारा नियंत्रित अखबार माना जाता है ।
- बीते दिनों अफगानिस्तान को शामिल किए जाने की बात की गई थी ।
- अफगानिस्तान से अमेरिका और पश्चिमी देशों की वापसी से एक स्थान खाली हो गया है ।
- चीन इसे पूरा करने की कोशिश में है ।
- अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार है ।
- तालिबान हमेशा BRI और CPEC जैसी परियोजनाओं का विरोध करता है।
- सुरक्षा का एकमात्र तरीका है कि तालिबान को शामिल किया जाए।
भारत के लिए इस विस्तार के क्या मायने?
- इसके विस्तार से भारत के लिए सुरक्षा खतरा पैदा होगा ।
- नए निवेश से इस परियोजना के सफल होने की संभावना और अधिक हो जाएगी ।
- इस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व और अधिक बढ़ जाएगा।
- इससे भारत की स्थिति और अधिक कमजोर होगी ।
- जो भी देश इसका सदस्य बनेगा भारत के साथ उसका संबंध खराब होना स्पष्ट है।
- पिछले कुछ सालों से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जर्मनी के साथ भारत के संबंध बेहतर हुए हैं ।
- अफगानिस्तान– भारत का व्यापारिक साझेदार है।
निष्कर्ष
- भारत द्वारा इसका विरोध किया गया ।
- भारत का कहना है कि pok भारत का हिस्सा है ।
- इसमें किसी भी तरह की परियोजना देश की अखंडता के लिए खतरा है।
- भारत को अपनी राजनीतक स्थिति का लाभ उठाना चाहिए और समान धारणा रखने वाले देशों का आयोग लेना चाहिए ।
एशिया– अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर–
- यह एशिया – अफ्रीका के बीच आर्थिक गलियारा समझौता है ।
- इस परियोजना पर भारत, जापान और कुछ अफ्रीकी देशों ने इसपर हस्ताक्षर किए थे ।
- यह परियोजना चीन का मुकाबला करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंवेस्टमेंट पहल(G7)–
- यह विकासशील देशों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषित करने हेतु एक संयुक्त पहल है ।
- यह BRI परियोजना का मुकाबला कर सकती है।
- भारत इस पहल में G7 देशों के साथ सहयोग कर सकता है ।