खबरों में क्यों है?
- 28 जुलाई को राजस्थान के बाड़मेर में मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गया ।
- यह MIG-21 बाइडन का ट्रेनर संस्करण था ।
- इसमें सवार दोनों पायलटों की मृत्यु हो गई ।
- पायलटो के नाम – Flt Lt Advitiya Bal और WG CDR M Rana था।
MIG-21 का इतिहास
- यह 1960 के दशक की शुरुआत में इंडियन एयरफोर्स में शामिल किया गया था ।
- इसे सोवियत संघ के मिकोयान– गुरेविच क्लब द्वारा डिजाइन किया गया था।
- 1955 में MIG-21 द्वारा रूस में पहली उड़ान भरी गई।
- भारत ने रूस से 872 MIG-21 विमान खरीदे थे ।
- 1971–72 के बाद से अब तक लगभग 400 से भी अधिक MIG-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं ।
- रूसी वायुसेना ने 1985 में ही MIG-21 को सेवा से हटा दिया था।
भारत के MIG-21 विमान
- भारत में MIG-21 बायडन विमान अभी चार स्क्वाड्रन सेवा में मौजूद है।
- भारत में दो ट्रेनर संस्करण सहित प्रत्येक स्क्वाड्रन में 16 से 18 विमान शामिल हैं।
- इनमें से एक श्रीनगर स्थित नंबर– 51 स्क्वाड्रन 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो जाएगा।
- बाकी बचे स्क्वाड्रन भी 2025 तक सेवा मुक्त हो जाएंगे ।
- इनके सेवा मुक्त होने के बाद उनके खाली जगह की पूर्ति के लिए स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LAC) तेजस का प्रयोग किया जाएगा।
विमान के अन्य संस्करण
- MIG-21 bis और MIG-21 Fl को पहले ही सेवामुक्त किया जा चुका है।
- MIG-21 Bison जो कि 1976 में भारतीय वायुसेन में शामिल किया गया था।
- इसे भी चरणबद्ध तरीके से 2025 तक सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।
MIG-21 को फ्लाइंग कॉफिन का नाम क्यों दिया जाता है?
- MIG-21 को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े की रीड की हड्डी के रूप में जाना जाता रहा है।
- इसकी श्रेणी के विमानों की दुर्घटनाओं की संख्या सबसे ज्यादा है।
- इसपर खराब सुरक्षा रिकॉर्ड के आरोप भी लगे हैं।
- इन दुर्घटनाओं में 170 से अधिक पायलटों की मौत भी हो चुकी है।
- 2010 से अब तक 20 से अधिक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।
- 2003 से 2013 के बीच 38 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे ।
- दुर्घटनाओं की उच्च दर के कारण ही इसे फ्लाइंग कॉफिन या विडोमेकर कहा जाता है।
वर्तमान उपयोग के कारण
- भारत में लड़ाकू विमानों की अपर्याप्त संख्या है।
- बहु भूमिका वाले लड़ाकू विमानों को शामिल करने में देरी हुई है।
- जिसकी वजह से MIG-21 पर अतिरिक्त भार दिखाई देता है ।
- भारत में 126 जेट की अनुमानित आवश्यकता है।
- जबकि अभी तक केवल 36 राफेल ही शामिल किए गए हैं।
- हल्के लड़ाकू विमान के निर्माण में निर्धारित समय से देरी हो रही है।
- इसके अलावा सुखोई 30 जैसे विमानों में सेवा क्षमता अच्छी नहीं है।
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भारतीय वायुसेना के बेड़े में अन्य विमान
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- MIG-21 के अलावा भारतीय वायुसेना के पास कई अन्य विमान हैं जैसे–
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Sukhoi Su–30MKI
यह भारतीय वायुसेना का अग्रिम पन्क्ति का लड़ाकू विमान है। यह बहु-उपयोगी लड़ाकू विमान रूस के सैन्य विमान निर्माता सुखोई तथा भारत के हिन्दुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड के सहयोग से बना है।
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Rafale
राफेल दो इंजन वाला फाइटर जेट है. राफेल जेट कई हथियारों को कैरी करने में सक्षम हैं, यह परमाणु हथियारों को लेकर उड़ान भरने में भी सक्षम है ,यह फ्रांस द्वारा निर्मित किया गया था।
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HAL Tejas LCA
तेजस भारत द्वारा विकसित किया जा रहा एक हल्का व कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है। यह हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला, अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम एक हल्का युद्धक विमान है। यह बिना पूँछ का, कम्पाउण्ड-डेल्टा पंख वाला विमान है।
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Mirage– 2000
डसॉल्ट Mirage 2000 एक फ्रांसिसी लडाकू विमान है। जिसका निर्माण डसॉल्ट से तकनिकी जानकारी लेकर भारत द्वारा किया गया है। शुरूआती समय मे कुछ विमान डसॉल्ट से पुरी तरह निर्मित लिए गए थे पर बाद मे भारत स्वयं इसका निर्माण करने लगा।
निष्कर्ष
- MIG-21 के दुर्घटना के आंकड़ों को देखते हुए इसे जल्द ही सेवा मुक्त कर देना चाहिए ।
- रक्षा मंत्रालय द्वारा तेजस 83 LCA– Mk– 1A को खरीदने के लिए HAL के साथ समझौता किया है।
- HAL द्वारा पहला MK–1A विमान 2025 तक दिए जाने की बात कही है।
- बाकी आपूर्ति 2030 तक कर दी जाएगी।
- चीन और पाकिस्तान से एक साथ निपटने के लिए 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है।
- वर्तमान में 32 स्क्वाड्रन मौजूद है।
- MIG-21 के सेवामुक्त के बाद 2024–25 तक यह संख्या घटकर 28 स्क्वाड्रन तक पहुंच जाएगी।
- गौरतलब है की रक्षा मंत्रालय को जल्द ही वायुसेना के बेड़े को और मजबूत बनाने का प्रयास करना चाहिए।