शार्ली एब्डो (Charlie Hebdo) खबरों में क्यों है?
हाल ही में ‘शार्ली एब्दो (Charlie Hebdo)’ के एक कार्टून ने ईरान में खलबली मचा दी थी। कार्टून में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई का मज़ाक उड़ाया गया था। कार्टून के जवाब में ईरान ने गुरुवार को फ्रांस के एक दशक पुराने शोध संस्थान को बंद कर दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक फ्रांसीसी शोध संस्थान को बंद करना कार्टून के जवाब में पहला कदम था। मंत्रालय ने कहा कि अखबार ने कार्टून के माध्यम से सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। इससे पहले बुधवार को ईरान ने फ्रांस के राजदूत को तलब कर अपना विरोध जताया था।
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शार्ली एब्डो-
परिचय–
Charlie Hebdo एक फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका है। इसके संपादक गेरार्ड बायर्ड हैं। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी। इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है। शार्ली एब्डो फरवरी 2006 में इस्लामिक पैगंबर मुहम्मद के कार्टून प्रकाशित करने के कारण चर्चा में आया, जिसे इस्लाम में ईशनिंदा माना जाता है।
शार्ली एब्डो के 3 नवंबर 2011 के कवर से ली गई छवि, जिसका शीर्षक शरिया हेब्दो (“शरिया हेब्दो”) है। गुब्बारा शब्द इस्लामिक पैगंबर मुहम्मद को यह कहते हुए दर्शाता है, “यदि आप हँसते हुए नहीं मरते हैं तो 100 लश!”
फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका Charlie Hebdo ने इस्लामिक पैगंबर मोहम्मद के कार्टून को फिर से प्रकाशित किया जो 2015 में एक घातक आतंकवादी हमले का लक्ष्य था। 7 जनवरी, 2015 को Charlie Hebdo हमलावरों की मदद करने के आरोपी 14 पुरुषों के मुकदमे के एक दिन बाद कार्टूनों को फिर से प्रकाशित किया गया था। इस हमले में मैगजीन के मशहूर कार्टूनिस्ट समेत 12 लोगों की मौत हो गई थी। कुछ दिनों बाद पेरिस में इसी तरह के एक हमले में पांच लोग मारे गए थे। इस हमले के बाद फ्रांस में आतंकी हमलों का सिलसिला शुरू हो गया। पत्रिका के 2020 संस्करण के कवर पर पैगंबर मुहम्मद के 12 कार्टून हैं, जो चार्ली हेब्दो में प्रकाशित होने से पहले डेनिश अखबार में प्रकाशित हुए थे।
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