बैंकिंग क्षेत्र से संबंधित अन्य शब्दावलियाँ

शाखा बैंकिंग (Branch Banking)

banking short terms

  • प्रधान शाखा के निर्देशन में बैंक की छोटी शाखाओं द्वारा बैंकिंग की सुविधा प्रदान करना शाखा बैंकिंग कहलाता है।

नेट बैंकिंग

  • इंटरनेट तथा कंप्यूटर की सहायता से उपभोक्ता द्वारा अपने बैंकिंग खातों का स्वयं संचालन व भुगतान, हस्तांतरण करना नेट बैंकिंग कहलाता है।

कोर बैंकिंग

  • कोर बैंकिंग में किसी वाणिज्यिक बैंक की सभी शाखाएँ इंटरनेट के माध्यम से एक दूसरे से जुड़ी होती हैं।
  • इसमें कोई भी शाखा दूसरी शाखा के खाते का विवरण देखने, जमा अथवा निकासी करने में सक्षम होती है।

नेफ्ट (NEFT) प्रणाली

  • यह एक खाते से दूसरे खाते में धन हस्तांतरण करने की एक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है।
  • इसके ज़रिये धन राशि के हस्तांतरण में कुछ समय लगता है अर्थात यह एक रियल टाइम प्रणाली नहीं है।

RTGS प्रणाली

  • इसके तहत धन का हस्तांतरण वास्तविक समय (Real Time) में होता है जिसकी अधिकतम अवधि 30 मिनट है।
  • इस प्रणाली से न्यूनतम 2 लाख या इससे अधिक राशि एक खाते से दूसरे खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप में हस्तांतरित की जा सकती है।
  • अधिकतम धन हस्तांतरण की सीमा बैंकों द्वारा स्वयं निर्धारित की जाती है। NEFT तथा RTGS का प्रबंधन रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया करता है।

ECS प्रणाली

  • ‘इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग स्कीम’ के माध्यम से बैंक अपने खाता धारक की लिखित अनुमति के बिना किंतु उसकी सहमति से अन्य संस्था को नियमित रूप से धन का हस्तांतरण करता है।
  • जैसे- ब्याज, वेतन,पेंशन, लाभांश आदि।

IFSC कोड

  • इंडियन फाइनेंशियल सिस्टम कोड, 11 अंकीय कोड होता है जो प्रत्येक बैंक के चेक पर छपा रहता है।
  • इसके पहले के चार अक्षरों में बैंक का नाम, अगला अंक शून्य तथा अंतिम 6 अंकों में बैंक ब्रांच से संबंधित विवरण होता है।

एम.आई.सी.आर. कोड (MICR Code)

  • बैंक चेक पर अंकित 9 अंकों का कोड जिसके 3 अंक बैंक शाखा के शहर का अगला 3 अंक बैंक का नाम तथा अंतिम 3 अंक बैंक ब्रांच का नाम होता है।

सावधि जमा (Time Deposit)

  • वाणिज्यिक बैंक द्वारा जमाकर्त्ता से एक ‘निश्चित अवधि’ के लिये प्राप्त जमा, सावधि जमा कहलाता है।

आवर्ती जमा (Recurring Deposit)

  • यह एक प्रकार का सावधि जमा ही होता है परंतु इसमें बैंक जमा एक मुश्त न प्राप्त कर मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक या वार्षिक तौर पर प्राप्त करता है।

बैंक ड्राफ्ट (Bank Draft)

  • यह किसी व्यक्ति विशेष या संगठन के नाम पर भुगतान के लिये बैंक द्वारा जारी साख प्रपत्र है जिसकी गारंटी जारीकर्त्ता बैंक की होती है। क्योंकि उसे भुगतान किया जा चुका है।

लीवरेज अनुपात

  • यह बैंकों का ऋण-संपत्ति अनुपात प्रदर्शित करता है। यह अनपात जितना ऊँचा होगा बैंकों की ब्याज देयता उतनी ही अधिक होगी।

पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR)

  • पूंजी पर्याप्तता से तात्पर्य ऐसी पूंजी से है जिसे उस कंपनी (बैंक) द्वारा किसी व्यापारिक साख सृजन हेतु एक निश्चित मात्रा तक अपने पास रखना होता है।
  • वर्ष 1992-93 से भारत बैंकों में पूंजी पर्याप्तता मानक लागू होना आरंभ हुआ।

CAR =Tier 1Capital + Tier II Capital

Risk Weighted Assets

इसे CRAR (Capital to Risk Weighted Assets Ratio) भी कहते हैं।

टीयर-I पूंजी– यह कोर पूंजी या मुख्य पूंजी होती है। यह अनपेक्षित हानियों के विरुद्ध तत्काल सहायता के रूप में उपलब्ध रहती है।

टीयर-II पूंजी– बैंकों की द्वितीयक पूंजी जो बंदी की स्थिति में हुए नुकसान से निपटने के लिये प्रयोग की जाती है।

टीयर-III पूंजी– ऐसी पूंजी जिसे बैंक अपने बाज़ार जोखिम, विदेशी मुद्रा जोखिम आदि से कुछ हद तक निपटने के लिये रखते हैं।

बेसल मापदंड– वर्ष 1974 में बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट (BIS) के तत्त्वाधान में बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन (BCBS) का गठन किया गया। कमेटी का कार्य अंतर्राष्ट्रीय नियामक पूंजी मानकों का विकास करना था, इन्हें ही बेसल मानक कहते हैं।

बेसल-I– वर्ष 1988 में इसे बेसल समिति ने प्रस्तुत किया तथा बैंकों के लिये अपने जोखिम भारित ऋण पर कम से कम 8 प्रतिशत पूंजी बनाए रखना अनिवार्य माना। भारत में इस दर को 9 प्रतिशत बनाए रखने का प्रावधान किया गया।

बेसल-II– इसे बेसल समिति ने वर्ष 2004 में प्रस्तुत किया। यह मानक पूंजीगत आवश्यकता, पर्यवेक्षण, समीक्षा तथा बाज़ार अनुशासन के तीन स्तंभों पर आधारित है।

बेसल-III– बेसल मानक वर्ष 2010 में प्रस्तुत किया गया। इसमें CRAR को न्यूनतम 9 प्रतिशत बनाए रखने को कहा गया है। RBI ने वर्ष 2011 में बेसल मानक के लिये दिशा-निर्देश जारी किया।

व्हाइट लेबल एटीएम

  • गैर-बैंकिंग कंपनियों के स्वामित्व में और उनके द्वारा संचालित किये जाने वाले एटीएम को व्हाइट लेबल एटीएम (WLA) कहते हैं।
  • प्रथम व्हाइट लेबल एटीएम ‘टाटा कम्यूनिकेशंस पेमेंट सॉल्यूशंस लिमिटेड’ द्वारा ‘इंडीकैश’ नाम से वर्ष- 2013 में थाणे (महाराष्ट्र) के क्षेत्र चंद्रपाड़ा में स्थापित किया गया।
  • अन्य कंपनियों में प्रिज्म पेमेंट सर्विसेज प्रा. लिमिटेड- मनीस्पॉट तथा मुथूट फाइनेंस लिमिटेड ‘मुथूट एटीएम’ के नाम से WLA संचालित कर रही हैं।
  • WLA में कुछ शर्तों के साथ स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति प्रदान की गई है।

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