बैंकिंग नियमन अधिनियम, 1949
– इस अधिनियम द्वारा वाणिज्यिक बैंकों के नियमन एवं नियंत्रण का अधिकार रिज़र्व बैंक को प्रदान किया गया है।
वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण
– 19 जुलाई, 1969 को 14 वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
विभेदीकृत ब्याज दर योजना, 1972
– बैंकों द्वारा जारी ऋणों में से एक निश्चित अनुपात में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराना।
बैंकों का पुनः राष्ट्रीयकरण, 1980
– 6 अन्य वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
बैंकिंग लोकपाल योजना, 1995
– बैंकों से संबंधित शिकायतों के निराकरण हेतु बैंकिंग लोकपाल की नियुक्ति।
स्वरोज़गार क्रेडिट कार्ड योजना (SCC Scheme), 2003
– इसकी शुरुआत नाबार्ड द्वारा की गई। यह योजना मूलतः अत्यंत छोटे उद्यमियों को सूक्ष्म ऋण प्रदान करती है।
SARFAESI अधिनियम, 2002
– इस अधिनियम का उद्देश्य न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना बैंकों/वित्तीय संस्थाओं को अपनी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) की रिकवरी का अधिकार प्रदान करना है। अधिनियम NPA की रिकवरी के लिये निम्न वैकल्पिक विधियों की व्यवस्था करता है
भुगतान न होने पर गिरवी प्रतिभूतियों को जब्त करना।
प्रतिभूतियों को संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (ARCs) को बेच देना।
उस कंपनी/संस्थान का प्रबंधन अपने हाथ में ले लेना
SARFAESI अधिनिमय में वर्ष 2016 में संशोधन किया गया है। इन संशोधनों द्वारा डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल्स (DRT) तथा संपत्ति पुनर्निर्माण की प्रभाविता बढ़ाने का कार्य किया गया है।
इंद्रधनुष योजनाः
इस योजना का उद्देश्य बैंकों के बढ़ते हुए एनपीए तथा घटते हुए पूंजी पर्याप्तता अनुपात की समस्या का समाधान करना है। यह योजना अगस्त, 2015 में प्रस्तुत की गई।