प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)
- ऐसे कर जिनके मौद्रिक बोझ को दूसरों पर टाला न जा सके अर्थात् कराघात तथा करापात उसी व्यक्ति पर पड़े जिस पर कर लगाया गया है।
आयकर
- किसी व्यक्ति विशेष की शुद्ध वार्षिक आय पर लगाया गया कर। इसकी वसूली केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अंतर्गत आयकर विभाग द्वारा की जाती है।
- भारत में आयकर अवक्रमिक प्रणाली जो कि प्रगतिशील तथा आनुपातिक का मिश्रण है, पर आधारित है।
निगम कर
- किसी कंपनी की शुद्ध वार्षिक आय पर लगाया जाने वाला कर निगम कर कहलाता है।
संपदा कर
- किसी व्यक्ति की संपूर्ण व्यक्तिगत संपत्ति पर लगाया जाने वाला कर संपत्ति कर कहलाता है।
न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT)
- यह कंपनी के सकल लाभ के उस भाग पर लगाया जाता है जिस पर निगम कर का भुगतान न हुआ हो।
- पहली बार वर्ष 1997-98 में निगम कर की चोरी रोकने के लिये इसे लगाया गया था।
- यह एक प्रत्यक्ष कर है जिसे शून्य लाभ बताकर करों को बचाने वाली कंपनियों पर लगाया जाता है।
- वस्तुतः कंपनियाँ वास्तविकता में लाभांश अर्जित करती हैं लेकिन कर बचाने के लिये शून्य लाभ बताती हैं।
- सेट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT): प्रत्यक्ष करों की उगाही से जुड़े सभी मामलों के निपटान के लिये CBDT की स्थापना सेंट्रल बोर्ड ऑफ रिवेन्यू एक्ट, 1963 के अधीन की गई है।
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes )
- वस्तुओं तथा सेवाओं पर लगाया गया ऐसा कर जिसके बोझ को स्थानांतरित किया जाना संभव होता है अर्थात् इसमें कराघात तथा करापात अलग-अलग व्यक्तियों पर होता है।
सीमा शुल्क (Custom Duty)
- यह देश से होने वाले आयात-निर्यात पर लगाया जाता है।
- केंद्रीय उत्पाद तथा सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) कस्टम ड्यूटी से संबंधित सभी मामलों का निपटारा करता है।
वस्तु एवं सेवा कर (GST)
- विनिर्माता से उपभोक्ता तक वस्तु तथा सेवाओं की आपूर्ति के प्रत्येक चरण पर लगने वाला कर जिसका बोझ अंतिम उपभोक्ता वहन करता है।
- यह 1 जुलाई, 2017 से लागू हुआ।
- वर्ष 2003 में सर्वप्रथम अप्रत्यक्ष कर पर गठित केलकर टास्क फोर्स ने GST का प्रस्ताव दिया।
- भारतीय संविधान में ‘संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016’ जो 8 सितंबर, 2016 को अधिनियमित हुआ के द्वारा GST का प्रावधान किया गया।
- वस्तु एवं सेवा कर के अंतर्गत वस्तुओं एवं सेवाओं को कर की 5 अलग-अलग दरों के समूहों में वर्गीकृत किया गया है।
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GST परिषद्
अनुच्छेद-279 A के तहत राष्ट्रपति एक जीएसटी परिषद् का गठन करेंगे जिसका उद्देश्य देश में वस्तुओं तथा सेवाओं के एकीकृत तथा समन्वित बाज़ार का विकास करना होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री -अध्यक्ष किसी राज्य के वित्त मंत्री -उपाध्यक्ष केंद्रीय राजस्व राज्य मंत्री – सदस्य राज्यों के वित्त मंत्री – सदस्य नोट: वस्तु एवं सेवा कर (GST) से संबंधित महत्त्वपूर्ण अवधारणाओं, दरों, प्रक्रिया, संगणना एवं नियम-विनियमों में GST परिषद् द्वारा आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है। |
सक्षम परियोजना (Project Saksham)
यह केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) की एक नई अप्रत्यक्ष कर नेटवर्क (तंत्र एकीकरण) परियोजना है जिसका उद्देश्य वस्तु एवं सेवा कर (GST) के कार्यान्वयन, व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिये ‘भारतीय सीमा शुल्क सिंगल विंडो इंटरफेस (SWIFT)’ के विस्तार तथा डिजिटल इंडिया एवं इज ऑफ डूइंग बिजनेस कार्यक्रमों के तहत बोर्ड द्वारा प्रारंभ की गई करदाता अनुकूल पहलों को मदद प्रदान करना है। सक्षम परियोजना के माध्यम से केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC), वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) के साथ एकीकृत हो सकता है जिससे यह पंजीकरण, भुगतान तथा GSTN सिस्टम द्वारा भेजे गए अन्य डेटा को प्रसंस्कृत कर पाएगा।